दिल-ए-मुर्तजा बन जाए , होगी इख़्तियार तेरे आरजू की
दिल-ए-मुर्तजा बन जाए , होगी इख़्तियार तेरे आरजू की
तेरे दरबार में सजदा जु , मुझे तो आरज़ू तेरे गुफ्तगू की
न ख्याल तर हु, न गुमशुदा हु अफाक ए महफ़िल से
तेरी इबादत में , हा तलब बस मुझे तेरी जुस्तजू की

दिल-ए-मुर्तजा बन जाए , होगी इख़्तियार तेरे आरजू की
तेरे दरबार में सजदा जु , मुझे तो आरज़ू तेरे गुफ्तगू की
न ख्याल तर हु, न गुमशुदा हु अफाक ए महफ़िल से
तेरी इबादत में , हा तलब बस मुझे तेरी जुस्तजू की

“यह जरूरी नही है के हम समय को कितना महत्व दे रहे है , महत्व यह है के हम समय…
यह दुनिया इस कदर , गुम है अपनी जहालत में हिसाब सब का जरूर होगा, एक दिन कयामत में दर्द…
Unity in Diversity: The Concept of Religions Across Cultures By: Shahid Siddiqui Chapter I: Introduction Religion has been an…
“ इंसान गलतियों से सबक सिखता है, यह जरूरी नहीं के कोन गलत है, जरूरी यह है क्या गलत है….
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Update version : 1.0-11-12-2024 जिंदगी के पहलू में रिश्ते की हकीकत रिश्ते जीवन का आधार हैं। वे हमारे अनुभवों, भावनाओं…