अमेरिका ने भारत को रूस से तेल खरीदने की छूट क्यों दी? आइए जानते हैं असली सच्चाई!
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से ही दुनिया भर की राजनीति और तेल बाज़ार में भूचाल सा आ गया है। अमेरिका और यूरोप ने रूस पर कई सारी पाबंदियां (sanctions) लगा दीं।
लेकिन इन सबके बीच एक सवाल हर किसी के दिमाग में आता है — जब रूस पर इतने सारे बैन लगे हैं, तो फिर भारत वहां से तेल कैसे खरीद रहा है? क्या अमेरिका ने भारत को इसकी परमिशन दी है? सच मानिए, इसका जवाब बड़ा दिलचस्प है।
क्या भारत को अमेरिका से परमिशन लेनी पड़ती है? सबसे पहली बात जो हमें समझनी चाहिए, वो ये है कि भारत एक आज़ाद देश है। हमें अपनी जरूरत का तेल कहां से खरीदना है, इसके लिए अमेरिका या किसी और देश से इजाज़त लेने की कोई जरूरत नहीं है। भारत अपने देश और अपनी जनता के फायदे के हिसाब से खुद फैसले लेता है।
फिर भारत रूस से ही तेल क्यों खरीद रहा है? जब रूस पर बैन लगे, तो उसने अपना तेल भारी डिस्काउंट (सस्ते दाम) पर बेचना शुरू कर दिया। भारत जैसे इतने बड़े देश के लिए यह एक बहुत बढ़िया मौका था। सस्ता तेल मिलने से हमें सीधे तौर पर ये फायदे होते हैं:
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देश की रोज़मर्रा की ऊर्जा (एनर्जी) की जरूरतें आसानी से पूरी होती हैं।
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पेट्रोल और डीज़ल के दाम बढ़ने से रुकते हैं।
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आम जनता को महंगाई से थोड़ी राहत मिलती है।
यही सबसे बड़ी वजह है कि भारत ने रूस से तेल खरीदना जारी रखा।
तो फिर अमेरिका ने इसका विरोध क्यों नहीं किया? अमेरिका भी बहुत समझदार है। वो अच्छे से जानता है कि अगर रूस का तेल मार्केट से पूरी तरह गायब हो गया, तो दुनिया भर में तेल की भारी कमी हो जाएगी और दाम आसमान छूने लगेंगे। इससे पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था (इकोनॉमी) डगमगा जाएगी।
इसीलिए अमेरिका और G7 देशों ने ‘प्राइस कैप’ (Price Cap) नाम की एक पॉलिसी निकाली। इसका सीधा सा मतलब ये है कि रूस अपना तेल एक लिमिट से ज्यादा महंगी कीमत पर नहीं बेच सकता, लेकिन दुनिया में उसकी तेल की सप्लाई भी पूरी तरह से बंद नहीं होगी।
दुनिया की राजनीति का असली खेल आज की दुनिया में हर देश अपना-अपना फायदा देखता है। भारत सस्ता तेल खरीदकर अपनी इकोनॉमी को मजबूत कर रहा है। वहीं, अमेरिका चाहता है कि रूस ज्यादा पैसे भी न कमाए और दुनिया में तेल की कमी भी न हो। कुल मिलाकर, यह कूटनीति और अर्थव्यवस्था का एक बेहतरीन तालमेल है।
निष्कर्ष सच तो यही है कि भारत को रूस से तेल लेने के लिए अमेरिका की हरी झंडी की कोई जरूरत नहीं है। भारत अपने देश के हित में फैसले लेता है, और दुनिया के तेल बाज़ार को बैलेंस रखने के लिए बाकी देश भी इस सच्चाई को समझते हैं।
✍️ लेखक: CA शाहिद सिद्दीकी